कविता: मेरा गांव, मेरा जीवन

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गांव तेरे गोद में बचपन सुहाना बीत गयाचंद गलिया और अपनों में दिन पुराना बीत गयापनघटों पर भरती गगरी और रात की लोरियाऐसी जिंदगी...

कविता: तुम मेरी पुकार हो माँ – बालानाथ राय

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तुम मेरी पुकार हो माँ ज्ञान की भण्डार हो माँविद्वानों की जननी हो माँतुम मेरी पुकार हो माँसदैव मेरे साथ रहा करो माँअज्ञानियों को ज्ञान...

कविता : रात धीरे-धीरे

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रात धीरे-धीरेरात धीरे-धीरे दीवार फाँद गई,चाँद मेरी छत से होकर गुज़र गयाजुगनुओं का शोकगीत अब भी जारी है।गर्मागर्म मुद्दों की अलाव जलाकरसर्द सुबहों में...

कविता: नई नई किताबें

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वैसे तो किताबे हमारी मित्र है I किताबों पर ही बालानाथ राय ने एक कविता लिखी है जिसे आप भी पढ़िए-नई नई किताबे नई नई...

प्रेम की समझ : कविता

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मेरे इन दोस्तों कोप्रेम शायद समझ आ चुका हैउन्होंने चुन लिया है किसी न किसी कोजीवनभर साथ का हमसफ़रवे कहते हैउन्हें बेतहासा प्रेम हैअपनी...