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किसान ने उगाई कैंसर से लड़ने वाली रंगीन गोभी

बक्सर (विकास राय): आपने बाजार में सफेद गोभी देखी होगी। कुछ वर्ष पहले हरे रंग की एक और गोभी बाजार में आई थी। जिसका नाम ब्रोकली था। लेकिन, बाजार में गोभी की नई प्रजाति अपने यहां देखने को मिली है। जिसका रंग गुलाबी और पीला है।

वैसे भी अपने खुबशुरत आकार के कारण गोभी फूल के नाम से जानी जाती है। लेकिन, अब यह अपने गुणों के कारण मशहूर हो रही है। क्योंकि इसमें पोषक तत्व अन्य गाभियों से कई गुना ज्यादा हैं। अपने जिले में इसकी पैदावार बक्सर जनपद के गेरुआबाध के प्रगतिशिल किसान कमलेश पांडेय ने की है। जिसको लेकर इन दिनों वे काफी चर्चा में हैं।

उन्होंने बताया यह पहला प्रयास है। इस लिए गुलाबी और पीले रंग की तीन-तीन सौ गोभियां मैंने लगाई हैं। बाजार में इनका अच्छा मूल्य मिल रहा है। लोगों के लिए यह आकर्षण का केन्द्र भी हैं। उनके अनुसार वे सब्जियों की खेती वर्ष 2014 से करते आ रहे हैं। सिजेंटा कंपनी ने उन्हें इसके लिए पॉली हाउस प्रदान किया है। वहीं से बीज भी आते हैं।

अपने विशेष गुण के कारण यह गोभी तीस से पचास रुपये प्रति पीस बिक जाती है। इसे बहुत दूर ले जाने की जरुरत नहीं। स्थानीय बाजार में ही उसकी पर्याप्त मांग हैं।

कैंसर से लड़ने में सहायक है रंगीन गोभी: कृषि वैज्ञानिक

कृषि विश्वविद्यालय डुमरांव की वैज्ञानिक नीतू ने बताया कि आम गोभी की अपेक्षा यह गोभी पोषक तत्व से भरी होती है। पीले रंग की गोभी में प्रचूर मात्रा में विटामिन ए एवं कैरोटिन नाम तत्व पाया जाता है। जो कैंसर से लड़ने में सहायक है। गुलाबी गोभी में एंथोसाइमिन मिलता है।

वह कैंसर से लड़ने में सहायक है। इतना ही नहीं यह दोनों गोभियां एंटी औक्सीडेंट का काम करती हैं। जिससे शरीर में मौजूद हानिकार तत्व का नाश होता है।
दस गुना ज्यादा होता है फायदा
कमलेश पांडेय के अनुसार उन्होंने दो हेक्टेयर में सब्जी की खेती की है। इसमें उन्हें दस गुना ज्यादा मुनाफा हो रहा है। इतनी जमीन में गेहूं और धान की खेती करने पर समय भी ज्यादा लगता है और लाभ भी इसकी अपेक्षा बहुत कम होता है। उनकी माने तो बहुत बड़े पैमाने पर नहीं। लेकिन, छोटे किसान भी इस तरह की खेती से अधिक लाभ कमा सकते हैं।

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