गाज़ीपुर : प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के प्रदेश महासचिव व गाज़ीपुर के पूर्व में कांग्रेस के अध्यक्ष रहे एसपी पाण्डेय ने कांग्रेस में हो रहे उथल पुथल पर अपने फेसबुक पेज पर कांग्रेस को कुछ सुझाव दिए हैं। देखिये क्या लिखा है उन्होंने—

कांग्रेस का ईलाज चल रहा है और उम्मीद है कि वह बेहतर होकर बाहर निकलेगी,लेकिन इसके लिए जरूरी है कि उसके बीमारी को पकड़ा जाए!
सिर्फ “यू टू सिंधिया” कहने से काम नही चलने वाला! सीजर को अपनी सोच और रणनीति बदलनी होगी!
प्रश्न दो तरफा है कि —
१--कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व समूह ने अपने कार्यकर्ताओं को क्या दिया।
२--और उन कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस को क्या दिया।
दूसरा प्रश्न ही हमेशा पहला प्रश्न रहा है किसी राजनीतिक पार्टी के समग्रता पूर्वक विश्लेषण में। कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस को वह ऊंचाई दी जो अब तक भारत मे किसी भी दल को प्राप्त नही है।सत्ता तो दिया ही लोगों ने अपने दिल मे जगह दी और हर संकट की घड़ी से उसे बाहर खींच निकाला! क्योंकि वह कार्यकर्ताओं की निष्ठा थी और पार्टी की विचारधारा के प्रति अपना निजी जुड़ाव था क्योंकि सामाजिक और सांस्कृतिक संस्कार भी कुछ वैसा ही रहा।
लेकिन वर्तमान परिदृश्य में पहला प्रश्न ही मुख्य प्रश्न है और इसी में कांग्रेस का ईलाज भी है।
* आज कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व समूह से मेरा मतलब प्रदेश से लेकर देश के नेतृत्व तक है ना कि सिर्फ गांधी परिवार तक।
* सिंधिया जैसे तमाम लोग हैं जिन्होंने कांग्रेस से लिया ज्यादा है और जब देने का वक़्त आया तो तुरंत ही धैर्य खो दिया।
* संगठन के प्रति वरिष्ठों की निष्ठा लगातार कम होती चली जा रही है , निष्ठा केवल पद प्राप्ति तक सीमित होती जा रही।
* निष्ठाहीनता ने अनुशासनहीनता को बढ़ावा दिया है, ‘पद नही तो पार्टी नही’ के फार्मूले ने आज यहां लाकर खड़ा कर दिया है।
* संकट की इन घड़ियों में वैसे लोगों की कमी हो गयी है जो सबको साथ लेकर चलने का माद्दा रखते थे।इसमे संवादहीनता ने दोतरफा संकट खड़ा किया है।
* आज भी तमाम ऐसे समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता हैं जिन्होंने सिंधिया के राजनैतिक कैरियर से दूना समय देकर भी कांग्रेस से कुछ लाभ हासिल नही किया लेकिन विचारधारा के सवाल को लेकर लड़ते रहे।उनके साथ दिग्गज कांग्रेसजनों का व्यवहार कई बार अपमानजनक या उपेक्षापूर्ण रहा।
* संगठन की ही ताकत पार्टी की असली ताकत होती है ,विगत वर्षों में नेतृत्व द्वारा लगातार इस प्रश्न से आंख चुराया गया है।
* अंत मे अब पार्टी को अपना महाधिवेशन बुलाना चाहिए और कुछ ठोस कदम/ संगठन का चुनाव की ओर पहल करनी चाहिए।
(यह पोस्ट केवल इसलिए लिखा गया है कि मैं वैसे लोकतंत्र का समर्थक हूं जहां तमाम पार्टियां फले-फूले और खासकर वैसी पार्टीयां जो आईडिया ऑफ इंडिया के ज्यादा नज़दीक हो।)
एसपी पाण्डेय के फेसबुक वाल से

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