नई दिल्ली। टोल प्लाजा पर समय की बचत करने और आधुनिकता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने फास्टैग की शुरुआत की। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की माने तो हफ्ते में 1.60 करोड़ फास्टैग की बिक्री हुई है। वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक फास्टैग बिक्री में तेजी आई है। हर दिन करीब 1.20 लाख फास्टैग की बिक्री हो रही है। वही अब इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ईटीसी) तकनीक को फास्ट बनाने जा रही हैं। जिससे चालक 50 सेकंड में फास्टैग से ऑनलाइन टोल टैक्स का भुगतान कर सकेंगे। एक अधिकारी के मुताबिक़ फास्टैग अभी नई तकनीक है जिससे कुछ अड़चने आ रही हैं।

टोल प्लाजा पर सेंसर बैरियर के पास लगे हैं। सेंसर फास्टैग को समय पर रीड नहीं कर पा रहे हैं। अब मंत्रालय ने सेंसर को केबिन के 20 मीटर अधिक आगे लगाने के निर्देश दिए हैं। इससे वाहन के केबिन तक पहुंचने से पहले ही सेंसर फास्टैग रीड कर लेगा और ऑनलाइन टोल टैक्स भुगतान हो जाएगा।

वहीं, अभी ट्रक-कार के लिए पृथक लेन नहीं है। बड़े वाहनों के आगे खड़े होने से भी सेंसर फास्टैग रीड नहीं करते हैं। इसलिए जल्द ही ट्रक-कार की लेन पृथक करने की योजना है। इतना ही नहीं फास्टैग को लेकर सामने आ रही समस्याओं के समाधान के लिए मंत्रालय ने हेल्पलाइन नंबर 1033 को अपग्रेड कर दिया है।

1033 हेल्पलाइन नंबर पर प्रति माह 15,000 से अधिक शिकायतें आ रही हैं। इसमें 55 फीसदी शिकायतें टोल प्लाजा पर लगे सेंसरों द्वारा वाहन के फास्टैग को रीड नहीं करने से जुड़ी हैं। इससे ऑनलाइन भुगतान नहीं हो पा रहा है। देरी होने से वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इससे लोग घंटों परेशान रहते हैं।

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