भाजपा के प्रवक्ता और नेता चाहे जो भी कहे ठीकरा किसी के भी सर पर फोड़े लेकिन हकीकत तो कुछ और ही नजर आ रहा है। जी हां हम बात कर रहे हैं भाजपा के नरेन्द्र मोदी के चुनाव प्रचार की। ठीकरा तो इनके सर पर भी फूटना चाहिए। आप सोचेंगे क्यों? बताते हैं पढिये नीचे।

झारखंड चुनाव के लिए नरेन्द्र मोदी ने 9 रैलियां की. जिन इलाक़ों में मोदी ने रैलियां की उनके प्रभाव क्षेत्र में 33 सीटें आती हैं। इनमें से फ़िलहाल बीजेपी 22 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ रहा है। मोदी और शाह ने 9-9 जगहों पर रैलियां कीं। ख़ूब मेहनत की। दिन रात राष्ट्रीय मुद्दों को उठाया। राम मंदिर से लेकर नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी जैसे राष्ट्रीय मुद्दे उठाए, लेकिन जनता ने इस बार बीजेपी को नामंजूर कर दिया।

अगर सिर्फ़ मोदी की रैली वाली विधानसभा सीट की बात की जाए तो ताज़ा रुझान के मुताबिक़ 9 में से बीजेपी को 6 सीटों पर हार का सामना करना पड़ रहा है। सिर्फ़ धनबाद, डालटनगंज और खूंटी में बीजेपी को जीत मिली है, बाक़ी गुमला, बरही, बोकारो, दुमका, बरहेट और जमशेदपुर पूर्वी में हार का सामना करना पड़ा है।पिछले कुछ वर्षों में मोदी की छवि करिश्माई वक्ता और जनता को अपने पाले में खींचने वाले नेता के तौर पर स्थापित हुई है। लेकिन, झारखंड की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। ये कहानी बता रही है कि मोदी लोगों को खींचने में तो नाक़ामयाब हुए ही, अलबत्ता जहां-जहां वो गए, वहां-वहां लोगों ने उन्हें ख़ारिज़ कर दिया।

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