बाराचवर: मुहम्मदाबाद क्षेत्र के बगेन्द में आयोजित श्री रूद्र महायज्ञ के कथा मंच पर विराजमान अयोध्या वासी मानस मर्मज्ञ भागवतवेत्ता महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 श्री शिवराम दास जी उपाख्य फलाहारी बाबा ने उपस्थित श्रोताओं को गुरु की महत्ता समझाते हुवे कहा कि गुरु तत्व भारत चिंतन वल्लरी का वह पुष्प है जिसके सौरभ के बिना प्राणी मात्र यदि अग्रसरित होने की इच्छा रखता है तो केवल दम्भ मात्र ही सिद्ध होकर रह जाता है। गुरु का कार्य अपने शिष्य के अंदर से अहंकार एवं ममकार को तिरस्कृत एवं परिष्कृत करते हुए जीवात्मा और परमात्मा का संबंध स्थापित कराना है। स्थापित तो है ही जो ज्ञापित करा दे उसका नाम सद्गुरु है।

प्रभु श्रीराम के जीवन में वशिष्ठ जी महाराज गुरु की भूमिका अदा किए हैं तो विश्वामित्र जी सद्गुरु की भूमिका का निर्वहन करते हुए प्रभु श्री राम को विश्व के पटल पर लाकर एक आदर्श पुरुषोत्तम नरोत्तम की उपाधि दिलवाए।अहिल्या उद्धार की कथा करते हुए बाबा ने कहा कि एक भक्त प्रहलाद ने पत्थर से भगवान को प्रकट किया तो आज भगवान प्रभु श्री राम ने एक पत्थर से अहिल्या भक्ता को प्रकट किया। परमात्मा को पाने का दो ही रास्ता है प्रयास और प्रतीक्षा।

विश्वामित्र जी महाराज प्रयास से तपस्या से प्रभु श्री राम को प्राप्त किये है तो अहिल्या शबरी प्रतीक्षा से ही ब्रह्म की प्राप्ति की।फलाहारी बाबा ने कहा कि भाग्य चार प्रकार के होते हैं
बड़भागी अति बड़भागी परम बड़भागी और अभागी
सुनु जननी सोइ सुत बड़भागी। जे पितु मातु वचन अनुरागी।।
माता पिता की आज्ञा का पालन करके भी हम अपने आप को बड़भागी के श्रेणी में रख सकते हैं सर्वतीर्थमयी माता सर्वदेवमयः पिता। सारे तीर्थों का निवास मां के चरणों में तथा समस्त देवताओं का वास पिता के हृदय में होता है।माता-पिता को दुखी करने वाला संतान भविष्य में कभी सुखी नहीं हो सकता। हनुमान लक्ष्मण यदि बड़भागी है तो अहिल्या प्रतीक्षा करके ही अति बड़भागी बन गई एवं रामचरितमानस का सबसे नीच जाति का पक्षी जटायु जी एक नारी की रक्षा करते हुए परम बडभागी बन गये।
सुनहु उमा ते लोग अभागी।
हरि तजि होहिं विषय अनुरागी।।

वैदिक रीति प्राचीन विधि से अरणि मंथन कास्ठ घर्षण द्वारा वैदिक मंत्रों के मध्य मात्र एक मिनट मे ही अग्नि नारायण भगवान का प्राकटी करण होने पर यज्ञ पुरूष भगवान फलहारी बाबा के जयघोष से पुरा वातावरण भक्ति मय हो गया।

इस अवसर पर मनीष राय प्रधान. रवि कांत राय.डा० श्रीकांत राय.पूर्व शिक्षक स्वामी नाथ राय. राम व्यास राजभर. अंगद यादव. रमाकांत वर्मा.मुख्य यजमान नर्वदेश्वर राय. दयाशंकर राय. कैलाश ठाकुर.अरुण कुमार गुप्ता. गंगासागर पाल. सीताराम गुप्ता. श्रीधर राय. गुप्तेश्वर राय समेत हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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