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बाराचवर: शिव मंदिर, छठ और गन्दगी

रविवार के दिन छठ पूजा को व्रती महिलाओं ने पूरी श्रद्धा एवं विश्वास के साथ मनाया I छठ का पर्व मनाने की शुरुवात चार दिन पहले खाय नहाय के दिन से ही शुरू हो चूका था I महिलाएं अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद छठ का व्रत करती है I तीसरे और चौथे दिन तो पर्व का आनंद ही कुछ और रहा I जहाँ सभी महिलाओं ने पर्व में अपनी विशेष रुचि दिखाई वहीँ पुरुषों ने भी पूरी श्रद्धा के साथ इस पर्व में महिलाओं का साथ दिया I पतार, भरौली आला,गोसलपुर, डेहमा, ताजपुर, उतरावं, भरौली कलां, विश्वम्भरपुर, करकटपुर,लठुडीह, करीमुद्दीनपुर, दुबिहा, हरदासपुर, असवर, राजापुर, बांकी खुर्द, ,कमसडी., बाराचवर, खारा, माँटा, कुबरी, सह्जतपुर, कामुपुर, पलिया, लखनौली, बरेजी, गंधपा, विशुनपुरा, अतौली में छठ पर्व धूम-धाम से मनाया गया I

बाजार में दाम ने छुआ आसमान

कई दिन पहले ही जगह जगह बाज़ार सज चुका था I जिसके साथ ही खरीदारी बहुत तेजी से हुआ जिसमे फल और सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे I सामान्यतः केला 30-60 रु० तक मिलने वाला इस पर्व में 80-250 तक बिकाI वहीँ सेब का दाम चार दिन पहले तक 40-50 रु० तक रहने वाला इसा समय बढ़कर 100 के करीब बिका I सभी फलों का कमोवेश यही स्थिति रही I त्यौहार है लोगों की आस्था का सवाल है दाम का क्या?

कबसे हुआ शुरू

बाराचवर में छठ तीन जगह पर मनाया जाता है I पहला शिवजी के मंदिर जो बाराचवर ब्लाक से 200 के दूरी पर है और एक पलिया बाराचवर गांधीनगर मार्ग पर तीसरा, देवा पर ( माँ काली मंदिर के पास)  I करीब 25 साल पहले शुरू हुआ बाराचवर में छठ शिवजी के मंदिर से ही शुरू हुआ था जिसमे कुछ ही ग्रामीण शामिल हुए थे जिसके बाद आज लगभग प्रत्येक परिवार में छठ पूजा होता है I बाराचवर में शिवजी का मंदिर है वहीं सबसे पहले इसकी शुरुवात हुई थी I

 

एक तरफ गन्दगी दूसरी ओर आस्था

शिव जी के मंदिर के पास सबसे अधिक लोग छठ मनाने के लिए आते हैं I इस बार पूरा पोखरा ही भरा हुआ था कहीं भी जगह नहीं था I जिस पोखरे पर पूजा होता है उसी के बगल में पूरे गाँव की गन्दगी यानि की मल-मूत्र इकठ्ठा होता है I जिसकी वजह से वहां काफी गन्दगी है और स्थिति यह कि वहां पूरा पोखरा भरा हुआ है गन्दगी से उसके विपरीत वाले पोखरे में पूजा संपन्न हुआ I लेकिन जो स्थिति आज है यदि ऐसी ही रही तो आने वाले 3-4 सालो में सुद्ध पोखरा भे असुद्ध हो हो जायेगा I इससे पहले सांसद भरत सिंह से भी ग्रामीण नाले का पानी अन्यत्र गिराने को लेकर गुहार लगा चुके हैं लेकिन कार्यवाही के नाम पर कुछ हुआ नहीं है I अब सांसद बदल गये हैं लेकिन फिर भी आस्तिक सरकार में क्या कोई इसके लिए सोचेगा? बड़ा प्रश्न है I

रिपोर्ट-चन्दन शर्मा (9452818643)

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