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स्कूल की मनमानी के चलते डिप्रेशन में आई छात्रा ने की आत्महत्या

शाहजहांपुर: पहले विद्यालयों को शिक्षा का मंदिर कहा जाता था और अपने अध्यापकों विद्यार्थी शिक्षा निशुल्क प्राप्त करते थे और अध्यापक भी अपनी विद्यार्थियों को सस्ती और अच्छी शिक्षा मुहैया कराते थे। मगर कुछ सालों से शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव हुए हैं। वर्तमान समय में स्कूलों को व्यवसाय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। अर्थात अब प्राइवेट स्कूल शिक्षा का मंदिर नहीं बल्कि कमाई का साधन बन गए है। जनपद में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के चलते कहीं छात्र काफी परेशान हैं तो कहीं डिप्रेशन के चलते मौत को गले लगा रहे हैं।

मामला कोतवाली के तक्षशिला पब्लिक स्कूल का है जहां 11वीं की छात्रा सिद्धी गुप्ता को मन मुताबिक सब्जेक्ट ना मिलने पर उसने घर आकर जहर खा लिया। जहर खाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। जिसको जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

चर्चा है कि छात्रा सिद्धी के साथ उसका व्यापारी पिता पवन गुप्ता कई बार मन मुताबिक सब्जेक्ट दिलाने को लेकर प्रबंधक और प्रिंसिपल के सामने गिडगिडाये थे। लेकिन फर्स्ट डिवीजन पास छात्रा होने के बावजूद भी स्कूल प्रसाशन ने उसे मन मुताबिक सब्जेक्ट प्रबन्धक ने नहीं दिये। इस बात से छात्रा डिप्रेशन में चली गई और उसने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। इस बात से गुस्साए परिजनों ने अब स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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