यशवंत सिंह भड़ास 4 मीडिया के फाउंडर और संपादक ने अपने फेसबुक वाल पर पोस्ट किया है कि उनके भड़ास 4 मीडिया को गलगोटीया इंस्टिट्यूट के मालिकों ने बंद करवा दिया हैI आप भी पढ़िए उन्होंने क्या लिखा है अपने वाल पर –

वो लोग फिलहाल जीत गए लगते हैं। भड़ास बन्द करा दिया है। गलगोटिया वालों! ये धन के बल पर हासिल की गई जीत फौरी है। हम ऐसे सर्वर देख रहे हैं जो यूरोप के डीएमसीए कानून के पचड़े से परे हों। हो सकता है इस संकट से उबरने में हमें कुछ दिन लग जाएं पर जब उबरेंगे तो धोएंगे जमकर, देख लेना।

ज्ञात हो कि गलगोटिया विश्वविद्यालय के मालिकान भड़ास पर छपी उनसे संबंधित एक पुरानी खबर को हटवाने के लिए वर्षों से एड़ी-चोटी का जोर लगाए हैं. सबसे पहले विदेश में बैठे अपने चेलों से हमारे सर्वर होस्ट करने वाली कंपनी को यूरोप के dmca कानून के तहत बार बार कापीराइट नोटिस दिलवाते रहे. हम लोग बार बार जवाब और प्रमाण भेजते रहे. सच्चाई भी यही है कि पूरी खबर मैंने खुद लिखी और इसके एक-एक तथ्य वेरीफाइड हैं. लेकिन ये गलगोटिया वालों ने एक अमेरिकी कम्पनी को भड़ास से कंटेंट रिमूव कराने का ठेका दिया। उस कम्पनी ने एक वेबसाइट क्रिएट कर भड़ास के सम्बंधित कंटेंट को कॉपी किया और नोटिस भिजवा दिया भड़ास को कि भड़ास ने उनकी खबर कॉपी कर प्रकाशित किया है. हम लोगों ने लीगली सारे सबूत आदि भेजकर साबित किया कि ये खबर ओरिजनली हमारी है. पर करोड़ों रुपए ऊपर से नीचे तक खर्च कर चुके गलगोटिया ग्रुप के आर्थिक प्रलोभन में आकर अमेरिका स्थित सर्वर कम्पनी ने भड़ास4मीडिया वेबसाइट को अचानक बन्द कर दिया है. फिलहाल अपन की टीम non-dmca देशों के सर्वर पर भड़ास सेटअप करने की कोशिश कर रही है।

तस्वीरों में एक dmca के तहत सर्वर कम्पनी की तरफ से भेजे गए दर्जनों नोटिस में से एक है। दूसरी पिक में फर्जीवाड़े में अरेस्ट ध्रुव गलगोटिया और उसकी मां हैं। इसी फोटो और इससे सम्बंधित खबर हटवाने के लिए गलगोटिया विवि का मालिक व उसकी मां करोड़ों रुपए विदेश में खर्च कर चुके हैं।

भड़ास के लिए मुश्किल वक़्त है। उम्मीद है जल्द ही कुछ हल निकलेगा।

-यशवंत 

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