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हैदराबाद ओडीआई, मुश्किल हालात में जीती टीम इंडिया


क्रिकेट में निराशा के क्षण आते रहते हैं और फिर छंटते भी हैं। आज हैदराबाद के पहले ओडीआई में तजुर्बेकार एमएस धोनी (59 नाबाद 72 गेंदें) और अपेक्षाकृत युवा केदार जाधव (81 नाबाद 87 गेंदें) के बीच पांचवें विकेट के लिए 141 नाबाद पार्टनरशिप ने यही साबित किया। धोनी की जितनी आलोचना की जाए, वो खुद को हर बार उतना ही उपयोगी साबित करते हैं। उन्हें मालूम है कि टीम को क्या ज़रूरत है और उन्हें उसी अनुरूप खेलना है, क्रिटिक्स की सलाह पर नहीं। अब उन सभी को चुप हो जाना चाहिए जो अब भी चाहते हैं कि धोनी 2019 का वर्ल्ड कप नहीं खेलें। ये सब बातें सेलेक्टर्स और टीम पर छोड़ दी जाएँ क्योंकि वो बेहतर जानते हैं कि धोनी के तजुर्बे की वर्ल्ड कप में कितनी अहमियत है।
केदार जाधव को अभी तक सिर्फ आल राउंडर समझा जाता रहा है। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि वो उससे भी कहीं ज़्यादा हैं। वो बहुत बेहतर बल्लेबाज़ हैं और प्रेशर में खेलना जानते हैं। वो भले छोटे कद के हैं लेकिन सोच बड़ी है। सोचिये ज़रा टीम एक वक़्त 99 रन पर चार विकेट गवां चुकी थी। मंज़िल 138 रन दूर थी, कप्तान विराट कोहली (44) और हिटमैन रोहित शर्मा (37) सहित टॉप के चार बल्लेबाज़ पवेलियन लौट चुके थे और 70 परसेंट मैच ऑस्ट्रेलिया के पॉकेट में जाता दिख रहा था, तो ऐसे में अकेले धोनी का विशाल तजुर्बा भी नाकाफ़ी होता अगर केदार जाधव बल्ला अड़ा कर खड़े न हो जाते। बल्कि उन्होंने धोनी का ही प्रेशर रिलीज़ किया। दोनों ने 24.5 ओवर्स में 141 रन की पार्टनरशिप करके 10 गेंद बाकी रहते हुए छह विकेट से जिता दिया। ये कहना बेहतर होगा कि ऑस्ट्रेलिया के हाथ से मैच छीन लिया। केदार मैन ऑफ़ मैच भी बने और ये बिलकुल सही और आशानुसार फैसला रहा। केदार ने सात ओवर में 31 रन को एक विकेट भी लिया।
आज बहुत मुश्किल विकेट थी। ऑस्ट्रेलिया इसीलिए बड़ा स्कोर नहीं बना पाई। उस्मान ख्वाजा (50), स्टोइनिस (37) और ट्वेंटी-20 सीरीज़ के हीरो ग्लेन मैक्सवेल (40) को छोड़ कर बाकी कोई कुछ खास नहीं कर सका। इसमें टीम इंडिया के बॉलर्स की टाइट बॉलिंग का भी बहुत बड़ा हाथ रहा। कुलदीप यादव ने दो विकेट लेते हुए 46 रन दिए तो मो.शमी ने दो विकेट पर 44 रन। बुमराह थोड़े महंगे रहे, 60 लुटा गए। लेकिन उन्होंने भी दो विकेट लिए। बॉलिंग में सबसे ज्यादा तारीफ़ के हक़दार रहे रविंद्र जडेजा। उन्होंने अपने दस ओवर में 33 रन देते हुए विकेट तो एक भी नहीं लिया लेकिन मिडल ओवर्स में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों को बांधे रखा। अब वो इस परफॉरमेंस के दम पर वर्ल्ड कप की टीम में होंगे कि नहीं, ये यक्ष प्रश्न है।
बहरहाल कंगारूओं के जबड़े से जीत को छीनने के लिए टीम इंडिया को सिर्फ़ बधाई ही नहीं, बल्कि बहुत-बहुत बधाई, इसलिए कि मुश्किल विकेट पर और मुश्किल हालात में जीतना ही मज़ा देता है और संतुष्टि भी।

वीर विनोद छाबड़ा

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