चकिया (चन्दौली:): 28 फरवरी 2019, मोदी सरकार की लचर पैरवी और अपना पक्ष न रखने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने देश के बीस लाख से ज्यादा आदिवासी परिवारों की पुश्तैनी वन भूमि से बेदखली का आदेश दिया है। आरएसएस से जुड़े संगठनों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में वनाधिकार कानून को खत्म करने के लिए जनहित याचिका दाखिल की गयी और केन्द्र सरकार के वकील याचिका के समय उपस्थित ही नहीं हुए यहां तक की योगी सरकार के मुख्य सचिव ने अपने दाखिल शपथ पत्र में सुप्रीम कोर्ट को यह तक नहीं बताया कि प्रदेश में दाखिल दावों पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश से पुर्नविचार हो रहा है। इसलिए आदिवासी विरोधी मोदी सरकार के खिलाफ माकपा,भाकपा स्वराज अभियान व आदिवासी वनवासी महासभा ने चकिया में वनाधिकार मार्च निकालने के बाद गांधी पार्क में आयोजित सभा में उत्तर प्रदेश के पुलिस विभाग के पूर्व आई जी एस आर दारापुरी ने बोलते हुए कहा ।
उन्होंने कहा कि आदिवासियों व परम्परागत वन निवासियों के बेदखली आदेश के विरूद्ध दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वही स्टे मिलना जनादोलन की जित है। एक भी वन निवासियों को उजाड़ा जायेगा तो आंदोलन तेज होगा।
उन्होंने कहा कि आरएसएस के निर्देशन में आदिवासी समाज के अस्तित्व और अस्मिता दोनों पर हमला किया जा रहा है। आज तक कोल को आदिवासी का दर्जा नहीं मिला। अब जंगल की जमीन से बेदखली का यह आदेश उनके अस्तित्व को ही मिटा देगा
सभा में माकपा के तहसील मंत्री शम्भुनाथ यादव ने बोलते हुए कहा कि सरकार ने आदिवासियों को धोखा दिया है वनाधिकार कानून के तहत दिए दावे का तत्काल निस्तारण कर योगी जी की सरकार वन निवासियों को मालिकाना हक दे।
सभा के अन्त में उपजिलाधिकारी के मार्फत प्रधानमंत्री जी को यथा शीघ्र अघ्धादेश लाकर वन निवासियों के बेदखली पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्थायी रोक लगवाए।
सभा व वनाधिकार मार्च का नेतृत्व पुलिस विभाग के पूर्व आई जी एस आर दारापुरी,माकपा नेता शम्भुनाथ यादव स्वराज अभियान के अजय राय भाकपा के जिला मंत्री शुकदेव मिश्र,,नौजवान सभा के प्रदेश अध्यक्ष गुलाव चन्द वियार राजेन्द्र यादव शिवमुरत राम,भरत राम परमानन्द कुशवाहा,लालचन्द यादव,ने किया।


सभा की अध्यक्षता आदिवासी वनवासी के नेता रामदुलारे वनवासी,व संचालन स्वराज अभियान के नेता अजय राय ने किया ।

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