नौगढ़: 21 फरवरी 2019, सुप्रीम कोर्ट द्वारा वन भूमि से आदिवासियों और वन निवासियों के बेदखली का आदेश केन्द्र सरकार की लचर पैरवी के कारण आया है। हद यह हो गयी कि वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया की याचिका की सुनवाई के दौरान भारत सरकार के वकील तक सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित तक नहीं हुए। इसलिए केन्द्र सरकार को चाहिए कि आदिवासियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों के पुश्तैनी वन भूमि पर अधिकार की रक्षा के लिए अध्यादेश लाए और बेदखली पर रोक लगाएं। यह प्रतिक्रिया प्रेस को जारी अपने बयान में स्वराज अभियान के नेता व मजदूर किसान मंच के जिला प्रभारी अजय राय ने कल सुप्रीम कोर्ट द्वारा वनभूमि से जिन आदिवासियों और वन निवासियों के दावे खारिज हो गए है, उन्हें बेदखल करने के दिए आदेश पर दी।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर पूरे देश में और खासकर सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली में वनाधिकार कानून 2006 के अधिकार की अवहेलना की गयी थी। बिना विधिक प्रक्रिया का पालन किए और सुनवाई का अवसर दिए दावे खारिज कर दिए गए। इसके विरूद्ध आदिवासी वनवासी महासभा की तरफ से हमने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। जिस पर मुख्य न्यायाधीश की खण्ड़पीठ ने सरकार से दावों पर पुर्नविचार करने और जब तक दावों का निस्तारण न हो जाए तब तक बेदखल न करने का आदेश दिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में योगी सरकार के अधिवक्ता ने दायर अपने शपथ पत्र में इसका उल्लेख तक नहीं किया और 24 जुलाई तक पुश्तैनी वन भूमि से बेदखल करने को कहा है। इससे बड़े पैमाने पर आदिवासी व वन निवासी अपने अधिकार से वंचित होगें और उनका उत्पीड़न होगा। इसलिए सरकार को जब दावों का सम्पूर्ण और विधिक निस्तारण नहीं होता तब तक बेदखली की कार्यवाही पर रोक लगानी चाहिए।

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