क्रिकेट का सबसे बड़ा तीर्थ लॉर्ड्स, 30 जुलाई 1990. पहला टेस्ट, चौथा दिन इंग्लैंड के 653 पर 4 विकेट (इनिंग डिक्लेयर) के जवाब में भारत फॉलोऑन बचाने की जी-तोड़ कोशिश में लगी थी। स्कोर 376/6 विकेट। कप्तान अज़हरूद्दीन 117 रन पर और कपिल देव 14 रन बना कर क्रीज़ पर थे। फॉलोऑन से अभी 78 रन दूर। लेकिन जब तक दोनों क्रीज़ पर थे, उम्मीद जगी हुई थी। मगर 393 पर अज़हर 121 रन बना कर आउट हो गए तो सारी ज़िम्मेदारी हरफ़नमौला कपिल देव के बलिष्ट कन्धों पर आ गयी। किरण मोरे को उन्होंने बचाने की बहुतेरी कोशिश की लेकिन 430 पर मोरे और फिर अगली ही गेंद पर संजीव शर्मा आउट हो गए।
यानी अब एक विकेट बाकी और 24 रन चाहिए फॉलोऑन बचाने के लिए। ग्यारह नंबर के बल्लेबाज़ नरेंद्र हिरवाणी कब चले जाएँ, पता नहीं। लेकिन शुक्र था कि उस समय स्ट्राइक कपिल देव ले रहे थे और सामने थे राइट हैंड ऑफ-ब्रेक स्पिनर एडी हेम्मिंग्स, बड़ी-बड़ी घनी मूंछों वाले। कपिल देव स्पिन को तोड़ने के मास्टर थे। हर कोई सोच रहा था, तोड़ दे जितना तोड़ सकता है। अब किसी को क्या मालूम था कि बिलकुल यही ख्याल कपिल के दिमाग में भी चल रहा था। हेम्मिंग्स की पहली दो गेंद उन्होंने डिफेंसिव प्ले कर दीं। पब्लिक निराश हो गयी। लेकिन अभी तो पिक्चर बाकी थी। अब जो होने वाला था वो अद्भुत था, न देखा न सुना। कपिल देव ने एक के बाद एक चार छक्के उड़ा दिए। फॉलोऑन बच गया। हंगामा हो गया। अगर अगले ओवर की दूसरी बाल पर एंगस फ़्रेज़र ने हिरवानी का विकेट न उखाड़ा होता तो जिस मूड में कपिल थे, उसमें अभी काफी कमाल दिखाने की गुंजाईश थी।
कपिल देव 77 (75 गेंद) रन पर नॉट आउट रहे। हालांकि अंततः भारत की टीम ये टेस्ट 247 रन के बड़े मार्जिन से हार गयी थी और ये वही टेस्ट था जिसमें ग्राहम गूच ने 333 रन और 123 नॉट आउट की शानदार इनिंग्स खेली थीं, मगर चर्चा कपिल के चार लगातार छक्कों की हुई थी। टेस्ट क्रिकेट में कपिल देव पहले थे, जिन्होंने चार लगातार छक्के लगाए। बाद में 2004 में पाकिस्तान के शाहिद आफ़रीदी और 2006 में दक्षिण अफ्रीका के एबी डीविलियर्स ने इस रिकॉर्ड की बराबरी की। मगर कपिल का रिकॉर्ड इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उस समय उनपर फॉलोऑन बचाने का प्रेशर था। और उन्होंने फॉलोऑन बचा भी दिया।

वीर विनोद छाबड़ा (जाने माने लेखक एवं फ़िल्म समीक्षा)

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