गाजीपुर जनपद के गरूआ मकसूदपुर की ठाकुर बाड़ी पर आयोजित सात दिवसीय संगीतमय भागवत कथा के निमित्त एक भव्य कलश यात्रा निकाली गयी। यह कलश यात्रा गंगा तट पर बाजे-गाजे के साथ पहुंची और स्नान एवं पूजनोपरांत कलश में गंगा जल लेकर कथा स्थल पर वापस पहुंची। संगीतमय भागवत कथा में अयोध्या स्थित माधव कुंज से पधारे मानस मर्मज्ञ, भागवतवेत्ता श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर श्री शिवराम दास जी फलहारी बाबा ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा चारो वेदों का सार है। भागवत कथा भगवान कृष्ण की प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन एवं मुक्ति निर्वाण देने वाली है। आपने कहा की समस्त योनि में सारे सुख प्राप्त होते है किन्तु मनुष्य योनि में ही केवल सत्संग रूपी पुण्य सागर में डुबकी लगानें का मौका मिलता है। मनुष्य में मनुष्यता इंसान में इंसानियत केवल सत्संग से ही संभव है। महापुरुष का संग,सानिध्य,सामिप्य ही मोक्ष का दरवाजा खोलने की क्षमता रखता है। आपने उपस्थित श्रोताओं को ज्ञान एवं वैराग्य की कथा का रस पान कराते हुवे कहा कि साधु का क्षण और अन्न का कण बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। साधु से कभी भी सम्पत्ति की मांग नहीं करनी चाहिए बल्कि साधु से समय की मांग करनी चाहिए I वहीं अन्न का दुरूपयोग नहीं सदुपयोग करना चाहिए।

पूज्य फलहारी जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की कथा अनुकरणीय नहीं चिंतनीय है I भगवान राम मर्यादा पुरूषोत्तम है तो श्री कृष्ण प्रेम पुरूषोत्तम है। गोपी कोइ स्त्री नहीं अति शुद्ध जीव ही गोपी है।फलहारी बाबा ने श्रोताओं से कहा कि वर्णन की दृष्टि से श्रीमद्भागवत को चार प्रकार से विभाजित किया जा सकता है-घटनात्मक. उपदेशात्मक. अस्तुत्यात्मक और गीतात्मक।

भागवत की कथा सुनने से जीव का उद्धार हो जाता है वशर्ते श्रोता समर्पित हो तथा शरणागति के घाट पर बैठ कर कथा का श्रवण करें।कथा में मुख्य यजमान हुमेश्वर राय समेत सैकडों की संख्या में महिला एवं पुरूष श्रोता उपस्थित रहे I

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